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फूलझर माध्यमिक विद्यालय, भगत देवरी में पालक-शिक्षक सम्मेलन एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित



भगत देवरी 15 अक्टूबर 2026/ फूलझर माध्यमिक विद्यालय, भगत देवरी में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, नियमित उपस्थिति, अनुशासन तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पालक-शिक्षक सम्मेलन एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के माता-पिता एवं अभिभावक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस अवसर पर शाला विकास समिति के अध्यक्ष अशोक जी, डॉ. हेमंत कौशिक, दुर्गा शंकर जोशी, डोंगरीपाली से रवि कश्यप, गणेश राम साहू, संदीप अग्रवाल, बंटी अग्रवाल, कमलेश्वरी साहू, पुरषोत्तम साहू, ललिता यादव सहित विद्यालय के प्राचार्य तारेन्द साहू, अरुण दास सर एवं अन्य शिक्षकगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की पढ़ाई, विद्यालय में नियमित उपस्थिति, अनुशासन, अभिभावकों की जिम्मेदारी, यातायात नियमों के पालन तथा विद्यालय के नियमों से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, माता-पिता एवं शिक्षकों का सम्मान करने और जीवन में अनुशासन अपनाने की सीख दी। वहीं अभिभावकों से अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने तथा उनकी शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।


शाला विकास समिति के अध्यक्ष अशोक जी ने शिक्षा के महत्व पर दिया जोर


कार्यक्रम में शाला विकास समिति के अध्यक्ष अशोक जी ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य संवारने में विद्यालय और अभिभावकों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक विद्यालय में बच्चों को शिक्षा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, वहीं माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और दिनचर्या पर ध्यान दें।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें तथा उनकी पढ़ाई के प्रति गंभीर रहें। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के साथ उनमें अच्छे संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। विद्यालय एवं अभिभावकों के बीच बेहतर तालमेल रहने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में सुधार किया जा सकता है।


उन्होंने यह संदेश भी दिया कि बच्चों की छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। समय पर उठना, नियमित रूप से विद्यालय पहुंचना, घर पर पढ़ाई करना और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करना विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।


डॉ. हेमंत कौशिक ने बच्चों को मेहनत और अनुशासन की दी सीख


डॉ. हेमंत कौशिक ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने तथा जीवन में अनुशासन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की नींव तैयार करने का महत्वपूर्ण समय है। इस दौरान बच्चों को अपनी पढ़ाई के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए और समय का सदुपयोग करना चाहिए।


उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता एवं शिक्षकों का सम्मान करने, अच्छे संस्कार अपनाने और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने समझाया कि नियमित मेहनत, लगन और एकाग्रता से विद्यार्थी अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकते हैं।


उन्होंने अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई में सहयोग देने और उनकी समस्याओं को समझने की सलाह दी। बच्चों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें सही मार्गदर्शन देने से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और वे पढ़ाई के प्रति अधिक गंभीर बनते हैं।


दुर्गा शंकर जोशी ने अच्छे संस्कार अपनाने का किया आह्वान


दुर्गा शंकर जोशी ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने बच्चों से कहा कि पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार भी जीवन में महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए तथा विद्यालय में बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को नियमित अध्ययन करने, समय का सही उपयोग करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने की सलाह दी। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा के साथ संस्कारों का विकास भी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है।


रवि कश्यप डोंगरीपाली एवं गणेश राम साहू ने भी किया मार्गदर्शन


डोंगरीपाली से पहुंचे रवि कश्यप ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने और समय का सही उपयोग करने की सीख दी। उन्होंने बच्चों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए और अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए। गणेश राम साहू ने भी अपने संबोधन में शिक्षा, अनुशासन और अच्छे व्यवहार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने तथा अपने माता-पिता की अपेक्षाओं को समझते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में संदीप अग्रवाल, बंटी अग्रवाल एवं कमलेश्वरी साहू सहित अन्य उपस्थित लोगों ने भी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षा के प्रति जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।
प्राचार्य तारेन्द साहू ने विद्यार्थियों को दिया महत्वपूर्ण संदेश विद्यालय के प्राचार्य तारेन्द साहू ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन, नियमित उपस्थिति और विद्यालय के नियमों का पालन करने के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में पढ़ाई करने के लिए आने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। स्कूल में नियमित उपस्थिति, कक्षा में ध्यान देना, शिक्षकों की बात सुनना और दिए गए कार्यों को समय पर पूरा करना एक अच्छे विद्यार्थी की पहचान है।उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि विद्यालय में आने का उद्देश्य केवल उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करना और अपने भविष्य को बेहतर बनाना है। जो विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहते हैं और पढ़ाई पर ध्यान देते हैं, उन्हें विषयों को समझने तथा आगे बढ़ने में सहायता मिलती है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को विद्यालय के अनुशासन संबंधी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल में पढ़ाई का वातावरण बनाए रखने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को नियमों के प्रति गंभीर रहना चाहिए। स्मार्ट वॉच पहनकर विद्यालय आने पर भी मनाही प्राचार्य तारेन्द साहू ने विद्यार्थियों को स्मार्ट वॉच पहनकर विद्यालय नहीं आने के निर्देश के बारे में भी समझाया। उन्होंने बताया कि विद्यालय में पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों का ध्यान शिक्षा पर केंद्रित रहना चाहिए। इसलिए स्कूल के निर्धारित नियमों के अनुसार स्मार्ट वॉच पहनकर आने से मना किया गया है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि विद्यालय में अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। बच्चों को स्कूल के नियमों का पालन करना चाहिए तथा ऐसी वस्तुओं के उपयोग से बचना चाहिए, जिनसे पढ़ाई के दौरान ध्यान भटक सकता है। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को विद्यालय के नियमों की जानकारी दें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चे निर्धारित अनुशासन का पालन करते हुए स्कूल आएं। प्राचार्य ने अपने संबोधन में बच्चों को पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने, नियमित रूप से विद्यालय आने और अपने आचरण में सुधार लाने के लिए प्रेरित किया। उनका संदेश रहा कि अच्छी शिक्षा के लिए अनुशासन और जिम्मेदारी दोनों आवश्यक हैं।


अरुण दास सर ने विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों को भी समझाया


कार्यक्रम के दौरान अरुण दास सर ने विद्यार्थियों एवं पालकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बच्चों की नियमित उपस्थिति, पढ़ाई के प्रति गंभीरता और विद्यालय के नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने अभिभावकों को बताया कि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय के शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि माता-पिता को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी लगातार विद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं, तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। कक्षा में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने पर बच्चों को पाठ्यक्रम समझने में कठिनाई हो सकती है और वे पढ़ाई में पीछे रह सकते हैं। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की दिनचर्या पर ध्यान दें और बिना उचित कारण स्कूल से छुट्टी लेने की आदत को बढ़ावा न दें।अरुण दास सर ने सख्त शब्दों में चेतावनी दी कि लंबे समय तक विद्यालय से अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के नाम काटे जाने की कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार गलतियां करने और अनुशासनहीनता बरतने वाले विद्यार्थियों के विरुद्ध विद्यालय के नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में टीसी यानी स्थानांतरण प्रमाणपत्र देने की चेतावनी भी दी गई। उन्होंने पालकों को समझाया कि बच्चों को केवल स्कूल भेज देना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि बच्चा नियमित रूप से पढ़ाई कर रहा है या नहीं, विद्यालय में उसकी उपस्थिति कैसी है और वह शिक्षकों के निर्देशों का पालन कर रहा है या नहीं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे विद्यालय के साथ संपर्क बनाए रखें तथा बच्चों की किसी भी समस्या के संबंध में शिक्षकों से चर्चा करें। बच्चों को समय पर विद्यालय भेजने और पढ़ाई के प्रति जिम्मेदार बनाने में पालकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।


पुरषोत्तम साहू ने साइकिल चलाने एवं यातायात नियमों की दी जानकारी


कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क सुरक्षा के विषय पर भी विशेष चर्चा की गई। पुरषोत्तम साहू ने बच्चों को साइकिल चलाते समय सावधानी बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि विद्यालय आते-जाते समय सड़क पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है। साइकिल चलाते समय सामने से आने वाले और पीछे से गुजरने वाले वाहनों पर ध्यान देना चाहिए। सड़क पार करने से पहले दोनों ओर देखकर ही आगे बढ़ना चाहिए तथा सड़क पर लापरवाही से साइकिल नहीं चलानी चाहिए।उन्होंने बच्चों को यह भी बताया कि सड़क पर खेलना, अचानक रास्ता बदलना और यातायात नियमों की अनदेखी करना दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। विद्यार्थियों को छोटी उम्र से ही सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने की आदत डालनी चाहिए, ताकि वे स्वयं भी सुरक्षित रहें और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। बच्चों को समझाया गया कि सड़क पर चलते समय आपस में बातचीत या मस्ती में इतने व्यस्त नहीं होना चाहिए कि आसपास से गुजरने वाले वाहनों पर ध्यान ही न रहे। साइकिल चलाते समय सावधानी, धैर्य और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। ललिता यादव सहित उपस्थित लोगों ने भी बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।


बड़ी संख्या में पहुंचे पालक, बच्चों की पढ़ाई पर हुई चर्चा


कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के माता-पिता एवं अभिभावकों को आमंत्रित किया गया था और बड़ी संख्या में पालक कार्यक्रम में पहुंचे। अभिभावकों की सहभागिता से बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूकता और विद्यालय के साथ उनके जुड़ाव का महत्व सामने आया। कार्यक्रम में अभिभावकों को सलाह दी गई कि वे प्रतिदिन बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में बातचीत करें, उनकी दिनचर्या पर ध्यान दें और विद्यालय में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। यदि किसी विद्यार्थी को पढ़ाई में कठिनाई आती है, तो अभिभावक संबंधित शिक्षक से संपर्क कर उसका समाधान निकालने का प्रयास करें।


अभिभावकों को यह भी समझाया गया कि बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजना उनके भविष्य के लिए आवश्यक है। लंबे समय तक अनुपस्थित रहने से पढ़ाई का क्रम टूट सकता है। इसलिए बच्चों की छुट्टियों पर ध्यान देना और उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता देना जरूरी है। विद्यालय के शिक्षकगणों ने भी विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, नियमित उपस्थिति और अनुशासन की आवश्यकता पर जोर दिया। शिक्षकों एवं अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय रहने से बच्चों की समस्याओं को समय पर समझने और उनके समाधान में सहायता मिल सकती है।


शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदारी भी जरूरी
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक व्यवहार की शिक्षा देना भी जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए तथा अपने आसपास के लोगों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। बच्चों को समय का सही उपयोग करने, पढ़ाई के लिए नियमित समय निर्धारित करने और विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने की प्रेरणा दी गई। साथ ही अभिभावकों से कहा गया कि वे बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें, ताकि उनकी पढ़ाई और व्यवहार में आने वाली समस्याओं को समय रहते समझा जा सके।


वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यालय के नियम बच्चों को अनुशासित और जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से निर्धारित किए जाते हैं। विद्यार्थियों को इन नियमों को समझना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए। वहीं अभिभावकों को भी बच्चों के भीतर अच्छी आदतें विकसित करने में सहयोग देना चाहिए। विद्यालय, शिक्षक और पालक मिलकर संवारेंगे बच्चों का भविष्य फूलझर माध्यमिक विद्यालय, भगत देवरी में आयोजित पालक-शिक्षक सम्मेलन एवं जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा, नियमित उपस्थिति, अनुशासन और सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने, विद्यालय के नियमों का पालन करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। शाला विकास समिति के अध्यक्ष अशोक जी, डॉ. हेमंत कौशिक, दुर्गा शंकर जोशी, रवि कश्यप, गणेश राम साहू सहित अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन के माध्यम से बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। वहीं प्राचार्य तारेन्द साहू और अरुण दास सर ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को नियमित उपस्थिति, अनुशासन और विद्यालय के निर्देशों के पालन के संबंध में गंभीरता से समझाया।


कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए विद्यालय, शिक्षक, माता-पिता और समाज को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। अच्छी शिक्षा, नियमित उपस्थिति, अनुशासन, संस्कार और सुरक्षा के प्रति जागरूकता से ही विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

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