मिलाराबाद जैविक खेती हब के रूप में बना रहा है पहचान




महासमुंद, 14 मार्च 2026/ नेशनल मिशन ऑन इडिबल ऑयल–ऑयल सीड (एनएमईओ) योजना के अंतर्गत बसना विकासखण्ड के ग्राम मिलाराबाद मैदान में शनिवार को जिला स्तरीय किसान मेला एवं तिलहन महोत्सव, कृषि मेला सह कृषक–वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोगरा पटेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोगरा पटेल, सदस्य श्रीमती रामदुलारी,देवकी दीवान  सिन्हा,दीपा साहू,नरेश पटेल, अनुविभागीय अधिकारी हरिशंकर पैंकरा, तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू,उपसंचालक कृषि एफ आर कश्यप, कृषि विभाग के अधिकारी, उन्नत किसान  सहित किसान साथी मौजूद थे।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोगरा पटेल ने किसानों को बधाई देते हुए कहा कि आज सरकार किसानों को दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए प्रोत्साहित कर रही है।हर संभव सब्सिडी दे रही है। यहां क्षेत्र के किसान इसका अधिक से अधिक लाभ उठाए। 



जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि मिलाराबाद क्षेत्र जैविक खेती के लिए एक विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने किसानों को अधिक से अधिक उद्यानिकी फसलों की ओर अग्रसर होने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया । जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रामदुलारी सिंहा ने कहा कि इस क्षेत्र में इस तरह का सम्मेलन आयोजन करना बड़ी बात हैं इससे किसानों को प्रेरणा मिलेगी।

कार्यक्रम में किसानों ने अपने अनुभव भी साझा किए।  उन्हें प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में उन्नतशील किसान श्री अंतर्यामी प्रधान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पानी का संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से धान पर निर्भरता कम कर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती बढ़ाने, खुर्रा बोनी लाइनिंग पद्धति अपनाने, उर्वरकों का कम उपयोग करने तथा जैविक खेती की ओर आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने पशुपालन को भी खेती के साथ जोड़ने की बात कही।

यहां के किसान अवध राम चौधरी ने बताया कि उन्होंने 20 एकड़ में खीरा और करेला की खेती की है और आने वाले खरीफ सीजन में 5 एकड़ में उद्यानिकी फसल लगाने की योजना है। वहीं  युवा किसान वेदप्रकाश पटेल ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में 1 एकड़ में सरसों की खेती की थी, जो कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल साबित हुई। वर्तमान में वे लगभग 100 एकड़ में सरसों की खेती कर रहे हैं, जिसमें प्रति एकड़ 6 से 8 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे सोनालिका किस्म की सरसों की खेती कर रहे हैं।

मिलाराबाद क्षेत्र अब जैविक खेती के हब के रूप में नई पहचान बना रहा है। लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में किसान रबी फसल के दौरान दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे हैं। यहां के अधिकांश किसान धान पर निर्भर रहने के बजाय विविध फसलों और जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप ने बताया कि जिले में रबी सीजन के दौरान तिलहनी फसलों का रकबा 3125 हेक्टेयर, दलहनी फसलों का 6425 हेक्टेयर तथा अनाज फसलें रागी, मक्का और गेहूं का 5945 हेक्टेयर में विस्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि बसना और सरायपाली विकासखंड में 500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 475 क्विंटल प्रमाणित मूंगफली बीज का नि:शुल्क वितरण किया गया, जिससे लगभग 1700 किसान लाभान्वित हुए हैं। वहीं महासमुंद, पिथौरा और बागबाहरा विकासखंड में 200 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 200 क्विंटल मूंगफली बीज, कीटनाशक एवं सूक्ष्म पोषक तत्व का वितरण क्लस्टर में चयनित किसानों को किया गया है। इसकी खरीदी की व्यवस्था एफपीओ के माध्यम से बसना में की गई है।

उन्होंने बताया कि एनएमईओ तिलहन योजना के अंतर्गत जिले के सभी पांच विकासखंडों में 1080 हेक्टेयर क्षेत्र में 1040 मिट्टी नमूनों का परीक्षण कराया गया है। 

सवेरा24न्यूज़
राजेश साव 7240825555

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