पिथौरा। क्षेत्र में आदिवासी की जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने पर तहसीलदार पिथौरा द्वारा समुचित जांच के बाद कब्जा हटाने का विधिवत आदेश जारी किया गया है। हालांकि, इस आदेश से प्रभावित कुछ लोगों द्वारा प्रशासन की छवि धूमिल करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाए जाने का आरोप सामने आया है।
पीड़ित आदिवासी अरविंद नेताम ने बताया कि उन्होंने पिथौरा में अपने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मकान सहित जमीन खरीदी थी। आरोप है कि उक्त मकान पर एक व्यक्ति ने जबरदस्ती कब्जा कर लिया। कब्जा हटवाने के लिए उन्होंने तत्कालीन तहसीलदार से गुहार लगाई, लेकिन उस समय उनके अनुसार संबंधित अधिकारी ने यह कहते हुए मामले से हाथ खड़े कर लिए कि मकान खाली कराना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, और प्रकरण खारिज कर दिया गया।
नेताम का यह भी आरोप है कि न केवल उनके खरीदी गई जमीन पर कब्जा कराया गया, बल्कि शेष बची भूमि को भी हड़पने की नीयत से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। जैसे ही उन्हें इस गतिविधि की जानकारी मिली, उन्होंने पुनः तहसीलदार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की। बताया जा रहा है कि इस बार तहसीलदार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी से दो बार रिपोर्ट मंगाई। जांच के आधार पर स्पष्ट आदेश जारी करते हुए अवैध कब्जा हटाने और पीड़ित को जमीन का कब्जा दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद, पीड़ित का कहना है कि कुछ लोग उन्हें परेशान करने की नीयत से प्रशासन पर झूठे आरोप लगाकर भ्रामक जानकारी प्रसारित कर रहे हैं, जिसकी क्षेत्र में कड़ी निंदा की जा रही है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इस प्रकार के मामलों में अपील का प्रावधान उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद जानबूझकर प्रशासन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है
सवेरा 24 न्यूज संपादक राजेश साव 7240825555
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