संवाददाता-राजेश साव724082555
महासमुंद. जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव 1.5 करोड़ रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले का मुख्य षड्यंत्रकारी निकला। पुलिस ने 40 सदस्यीय टीम के 15 दिनों के तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर और वैज्ञानिक पूछताछ के बाद पूरे मामले का पर्दाफाश किया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दिसंबर 2025 में थाना सिंघोड़ा में जप्त 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित रखने के लिए खाद्य विभाग को सुपुर्द किया गया था। इसी दौरान खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर के मनीष चौधरी के साथ मिलकर गबन की योजना बनाई।
26 मार्च को सिंघोड़ा जाकर किया आंकलन
षड्यंत्र के तहत 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर ने सिंघोड़ा थाना पहुंचकर 6 कैप्सूल में उपलब्ध लगभग 102 मीट्रिक टन गैस का आंकलन किया। इसके बाद 1 करोड़ रुपये उगाही की योजना बनी। विभिन्न एजेंसियों से बातचीत के बाद 28 मार्च को ठाकुर पेट्रोकेमिकल से 80 लाख रुपये में डील फाइनल हुई।
पुलिस के अनुसार, खाद्य अधिकारी को 50 लाख, पंकज चंद्राकर को 20 लाख और मनीष चौधरी को 10 लाख रुपये देने की तय हुई थी। सुपुर्दनामा के बाद एक हफ्ते में 6 कैप्सूल से 92 टन गैस निकाल ली गई। बाद में कूटरचित वजन पंचनामा बनाकर कलेक्टोरेट में जमा कर दिया गया।
कूटरचित दस्तावेजों से किया गबन
जांच में सामने आया कि कैप्सूल खाली करने के बाद 6 और 8 अप्रैल को वजन कराया गया, लेकिन वजन प्रक्रिया में न ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक उपस्थित थे, न कोई स्वतंत्र गवाह। खाद्य अधिकारी कार्यालय में ही फर्जी पंचनामा तैयार कर हस्ताक्षर कर दिए गए। आश्चर्यजनक रूप से यह दस्तावेज 8 अप्रैल दोपहर कलेक्टोरेट में जमा हो गया, जबकि एक कैप्सूल का वजन उसी दिन रात 8 बजे के बाद हुआ था।
पुलिस ने मामले में खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 6.11 लाख रुपये नकद, मोबाइल और होम अप्लायंस का सामान जब्त किया गया है।
तकनीकी रिपोर्ट से हुआ खुलासा
जांच में तकनीकी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि सभी कैप्सूल मैकेनिकल फिट थे और लीकेज संभव नहीं था। 100 टन गैस का लीकेज बिना बड़े विस्फोट के संभव नहीं होता। पूरा सुपुर्दनामा खाद्य विभाग के माध्यम से हुआ था और एजेंसी का चयन भी विभाग ने ही किया था।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338, 340(2) बीएनएस और ईसी एक्ट की धारा 3,7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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