सरायपाली/चकरदा।महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चकरदा की प्रगतिशील महिला किसान, लछ्मी समृद्धि उत्पादन समिति एवं अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष तथा मरार पटेल समाज फुलझर राज महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष सुश्री हरिता पटेल (पिता – श्री जगदीश पटेल) ने खेती में नवाचार कर एक नई मिसाल कायम की है। लगातार कई वर्षों तक धान की खेती में नुकसान, अधिक पानी की आवश्यकता और समय पर सिंचाई नहीं मिलने की समस्या ने उन्हें आर्थिक रूप से प्रभावित किया। गिरते जलस्तर और अनिश्चित वर्षा के कारण फसल बार-बार खराब हो रही थी। लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खेती में बदलाव का साहसिक निर्णय लिया।
हरिता पटेल ने पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर फसल विविधीकरण को अपनाया। जल संकट को ध्यान में रखते हुए लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि में कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की खेती शुरू की। उन्होंने धनिया, सरसों, मूंगफली, टमाटर, तुरई, बैंगन, भुट्टा, मूंग और उड़द जैसी सूखा सहनशील फसलों को अपनाकर रबी सीजन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
हरिता पटेल बताती हैं,“धान की तुलना में सूखा सहनशील फसलों में लागत कम आती है और जोखिम भी कम रहता है। कम पानी में अच्छी पैदावार मिल रही है, जिससे आय में वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।”आज उनकी यह पहल जल संरक्षण, टिकाऊ खेती और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन चुकी है। उनके प्रयासों से क्षेत्र के किसान—विशेषकर महिला किसान—नई तकनीकों और फसल विविधीकरण की ओर प्रेरित हो रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम और जल संकट के दौर में फसल विविधीकरण ही सुरक्षित और लाभकारी खेती का भविष्य है। हरिता पटेल ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना, मेहनत और नवाचार से खेती में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की जा सकती हैं। आज पूरे क्षेत्र में हरिता पटेल का नाम एक सफल, जागरूक और प्रगतिशील महिला किसान के रूप में सम्मान के साथ लिया जा रहा है। यह कहानी केवल खेती की सफलता नहीं, बल्कि हिम्मत, दूरदर्शिता और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल है।
सवेरा 24 न्यूज संपादकराजेश साव 7240825555
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