छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र में संचालित एक HP गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में बिना वास्तविक गैस आपूर्ति किए ही उपभोक्ताओं के नाम पर डिलीवरी दर्ज कर दी जा रही है। यह स्थिति न केवल उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ी चिंता पैदा करती है, बल्कि सब्सिडी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
जानकारी के अनुसार, एक उपभोक्ता को 03 मार्च 2026 को एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें गैस सिलेंडर की डिलीवरी उसी दिन दिखाए जाने और अगली बुकिंग की तिथि 18 अप्रैल 2026 निर्धारित होने की सूचना दी गई। जबकि संबंधित उपभोक्ता का कहना है कि उसने उस अवधि में कोई बुकिंग नहीं की थी और उसे सिलेंडर भी प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद एजेंसी के रिकॉर्ड में डिलीवरी दर्ज होना संदेह को जन्म देता है। मामले को लेकर जब एजेंसी से संपर्क कर स्पष्टीकरण मांगा गया, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इस विषय को गंभीरता से लेने के बजाय टालमटोल का रवैया अपनाया और आवश्यक जानकारी साझा नहीं की। इससे आम लोगों के बीच अविश्वास की स्थिति बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना आपूर्ति के डिलीवरी दर्ज की जा रही है, तो यह एक व्यापक अनियमितता का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में फर्जी एंट्री के माध्यम से सब्सिडी लाभ लेने या सिलेंडर की आपूर्ति कहीं और करने जैसी आशंकाएं भी सामने आती हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उपभोक्ताओं के साथ अन्याय का मामला भी बन सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि LPG वितरण व्यवस्था में आमतौर पर OTP आधारित सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग किया जाता है। ऐसे में बिना उपभोक्ता की पुष्टि के डिलीवरी दर्ज होना प्रक्रिया में कमी या संभावित हेराफेरी की ओर इशारा करता है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि डिलीवरी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन ठीक से नहीं किया जा रहा।
इस घटना के बाद क्षेत्र के अन्य उपभोक्ता भी सतर्क हो गए हैं और अपने गैस कनेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की शिकायतों की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस मामले में जांच की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि संबंधित विभागों को हस्तक्षेप कर पूरी प्रक्रिया की जांच करनी चाहिए, जिसमें डिलीवरी रिकॉर्ड, सत्यापन प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका शामिल हो। साथ ही, यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह मामला केवल एक उपभोक्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और उपभोक्ताओं को कितना न्याय मिल पाता है।
रिपोर्टर - खेमराज साहू
सवेरा 24 न्यूज संपादक राजेश साव 7240825555
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