नेशनल हाईवे पर पसरा अंधेरा: भगतदेवरी में एक महीने से फ्यूज पड़ी स्ट्रीट लाइट, PWD विभाग बना मूकदर्शक



भगतदेवरी, पिथौरा। विकास की चमक का दावा करने वाली सरकार के दावों की पोल खोलती एक तस्वीर पिथौरा विकासखंड के ग्राम भगतदेवरी से सामने आई है। यहां से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर लगे स्ट्रीट लाइट के 5 खंभों की बत्ती एक महीने से फ्यूज पड़ी है, लेकिन लोक निर्माण विभाग यानी PWD ने अब तक सुध नहीं ली है। नतीजा, हाईवे का एक बड़ा हिस्सा शाम ढलते ही घुप्प अंधेरे में डूब जाता है। 

*क्या है पूरा मामला?*
ग्राम भगतदेवरी से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे-53 पर यात्रियों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कुछ साल पहले PWD विभाग ने स्ट्रीट लाइट लगवाई थीं। उद्देश्य साफ था: रात में हाईवे पर चलने वाले वाहनों को रोशनी मिले, दुर्घटनाओं पर अंकुश लगे और गांव के किनारे बसे लोगों को भी सुरक्षा का अहसास हो। शुरुआत में सब ठीक चला। दूधिया रोशनी में हाईवे जगमगाता था। राहगीर भी विभाग की तारीफ करते नहीं थकते थे। लेकिन बीते एक महीने से तस्वीर बदल गई है। हाईवे किनारे लगे कुल खंभों में से लगातार स्ट्रीट लाइट फ्यूज हो चुकी हैं। शाम 7 बजे के बाद करीब 300 मीटर का हिस्सा पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है। सबसे बड़ी बात, इस एक महीने में न तो PWD का कोई कर्मचारी आया, न कोई मेंटेनेंस टीम दिखी। ग्रामीण कई बार फोन कर चुके, पर जवाब एक ही मिलता है: "देखते हैं"।

*ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: "लाईट लगाई थी तो जलानी भी पड़ेगी"*
ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासी कहते हैं, "जब अंधेरा भगाने के लिए लाखों खर्च कर लाइट लगाई थी, तो अब फ्यूज होने पर बदलना भी विभाग की जिम्मेदारी है। क्या विभाग सिर्फ उद्घाटन के लिए है? मेंटेनेंस कौन करेगा?" महिलाओं की चिंता और ज्यादा है। गांव की महिलाओं ने बताया, "शाम को घर के बच्चों को ट्यूशन से लाने में डर लगता है। अंधेरे का फायदा उठाकर कोई भी घटना हो सकती है। हाईवे है, बड़ी-बड़ी गाड़ियां निकलती हैं। लाइट नहीं जलने से एक्सीडेंट का खतरा हर वक्त बना रहता है।"
युवाओं का कहना है कि भगतदेवरी चौक के पास अक्सर बस और छोटे वाहन सवारी उतारते हैं। अंधेरा होने से पिछले 15 दिन में 2 बार बाइक सवार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। गनीमत रही कि कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

*हाईवे पर अंधेरा मतलब दुर्घटना को न्योता*
नेशनल हाईवे-53 छत्तीसगढ़ की लाइफलाइन माना जाता है। रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन यहां से गुजरते हैं। भगतदेवरी के पास हाईवे पर हल्का मोड़ भी है। ऐसे में स्ट्रीट लाइट का बंद होना सीधे-सीधे दुर्घटना को न्योता देना है। 
रात में तेज रफ्तार ट्रक और बसें जब अचानक अंधेरे वाले हिस्से में पहुंचती हैं तो ब्रेक लगाने की नौबत आ जाती है। पीछे से आ रहा वाहन अगर असावधान हुआ तो टक्कर तय है। ऊपर से हाईवे किनारे गांव की सीमा शुरू होती है। कई बार मवेशी भी सड़क पर आ जाते हैं। रोशनी न होने से ड्राइवर को दूर से कुछ दिखता ही नहीं।
पिछले साल ही PWD ने “सड़क सुरक्षा माह” में बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगाकर बताया था कि “सुरक्षित सफर, हमारी जिम्मेदारी”। भगतदेवरी के ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या जिम्मेदारी सिर्फ होर्डिंग तक सीमित है?

*मेंटेनेंस का पैसा कहां गया?*
सबसे बड़ा सवाल यही है। जब हाईवे पर स्ट्रीट लाइट लगाने का टेंडर होता है तो उसमें 3 से 5 साल का मेंटेनेंस भी शामिल होता है। ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है कि फ्यूज लाइट तय समय में बदले। हर खंभे की एलईडी लाइट की वारंटी भी होती है। फिर एक महीना बीतने के बाद भी 5 लाइट क्यों नहीं बदली गईं?

*PWD विभाग का रवैया: शिकायत करो, इंतजार करो*
ग्रामीण बताते हैं कि पिछले महीने जब पहली लाइट फ्यूज हुई तो तुरंत PWD के स्थानीय दफ्तर में सूचना दी गई। जवाब मिला, "स्टाफ भेजते हैं"। 10 दिन बाद दूसरी और तीसरी लाइट भी बुझ गई। फिर फोन किया तो कहा गया, "सामान मंगाया है, आते ही लग जाएगा"। अब हालत ये है कि 5 लाइट फ्यूज हैं और विभाग का वही घिसा-पिटा जवाब: "प्रोसेस में है"।
सवाल ये है कि एक LED लाइट बदलने का “प्रोसेस” एक महीने का होता है क्या? अगर हाईवे पर किसी वीआईपी का काफिला गुजरना हो तो क्या PWD एक महीने लगाएगा? ग्रामीणों का कहना है कि आम जनता की जान की कीमत विभाग के लिए शायद कोई मायने नहीं रखती।

*अंधेरे से अपराध को बढ़ावा*
पुलिस सूत्र भी मानते हैं कि हाईवे पर अंधेरा अपराधियों के लिए मुफीद जगह बन जाता है। लूट, चेन स्नेचिंग और शराबखोरी की घटनाएं अक्सर अंधेरे वाले हिस्सों में होती हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द लाइट ठीक नहीं हुई तो कोई अप्रिय घटना हो सकती है। 

*क्या कहता है नियम?*
सड़क परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक नेशनल हाईवे से लगे सभी बसाहट वाले हिस्सों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट होना अनिवार्य है। एनएचएआई और PWD की संयुक्त जिम्मेदारी है कि लाइट चालू हालत में रहें। मेंटेनेंस में लापरवाही बरतने पर ठेकेदार पर पेनल्टी और ब्लैकलिस्ट करने का भी प्रावधान है। 

*ग्रामीणों की 3 बड़ी मांगें*
1. *तत्काल लाइट बदलो:* 5 फ्यूज स्ट्रीट लाइट को 48 घंटे के अंदर बदलकर चालू किया जाए।
2. *जवाबदेही तय हो:* एक महीने की देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार पर कार्रवाई हो। मेंटेनेंस का पैसा कहां खर्च हुआ, इसकी जांच हो।
3. *स्थाई समाधान:* हर महीने मेंटेनेंस टीम विजिट करे। फ्यूज लाइट की शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर सार्वजनिक किया जाए और 72 घंटे में समाधान की गारंटी हो।

*विकास का मतलब सिर्फ खंभा गाड़ना नहीं*
भगतदेवरी की ये स्ट्रीट लाइट सरकार के उन तमाम दावों पर सवाल खड़े करती हैं जिनमें “स्मार्ट विलेज” और “हाईटेक हाईवे” की बात होती है। विकास का मतलब सिर्फ उद्घाटन करके फीता काटना नहीं होता। विकास का मतलब है कि जो सुविधा दी गई है, वो लगातार चलती रहे। 
एक LED बदलने में 15 मिनट लगते हैं पर PWD को एक महीना लग गया और अभी तक काम नहीं हुआ। सोचिए, अगर यही रवैया रहा तो नल-जल, बिजली, सड़क हर योजना का यही हाल होगा।

*अब आगे क्या?*
फिलहाल भगतदेवरी के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि खबर छपने के बाद शायद विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटे। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वो अब और इंतजार नहीं करेंगे। अगर इस हफ्ते लाइट नहीं जली तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे और हाईवे पर धरना देंगे। नेशनल हाईवे पर अंधेरा सिर्फ भगतदेवरी की समस्या नहीं है। ये पूरे सिस्टम की उस मानसिकता को दिखाता है जहां “काम हो गया” का मतलब “उद्घाटन हो गया” होता है। मेंटेनेंस शब्द डिक्शनरी से गायब है।
PWD विभाग के अफसरों को समझना होगा कि हाईवे की एक-एक लाइट किसी की जिंदगी बचा सकती है। एक महीने से 5 परिवार रोज भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि अंधेरे की वजह से उनके घर का कोई सदस्य हादसे का शिकार न हो। क्या विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों तक है या जिंदगियों तक भी?

*आखिरी सवाल PWD से:* जब अंधेरा भगाने के लिए स्ट्रीट लाइट लगवाई थी, तो अब फ्यूज होने पर बदलने में एक महीना क्यों लग रहा है? जवाब दीजिए, क्योंकि भगतदेवरी का हाईवे जवाब मांग रहा है, और इस बार अंधेरा बहुत गहरा है।



 रिपोर्टर - खेमराज साहू 





सवेरा 24 न्यूज 
राजेश साव 7240825555

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